केतु ग्रह का विभिन्न भाव में फल

केतु ग्रह का विभिन्न भाव में फल

१. प्रथम भाव में स्थित केतु का फल :-


यहां स्थित केतू को अधिकांश मामलों में शुभफल देने वाला नहीं कहा गया है। फिर भी कुछ शुभफल तो मिलते ही हैं। जिसके कारण आप परिश्रम पर विश्वास करने वाले परिश्रमी व्यक्ति हैं। अपने परिश्रम के दम पर आप धनवान बन सकते हैं। भाई बंधुओं का सहयोग मिलने के कारन आप सुखी रहेंगे। लेकिन अशुभता के कारण आप मन से चंचल और डरपोक हो सकते हैं। थोडी से भी कठिनाई मिलते ही आप पलायन करने का मन बना लेते हैं।
आप भय से व्याकुल और चिंतातुर हो जाते हैं। केतू मन में घबराहट भी पैदा करता है। आपमें चित्त भ्रम और मानसिक चिंता की अधिकता रह सकती है। आप की संगति खराब व्यक्तियों से हो सकती है। आप झूठ बोलने पर ज्यादा यकीन कर सकते हैं। विद्या में आपकी रुचि कम हो सकती है अथवा शिक्षा में कुछ व्यवधान आ सकता है। हांलाकि जानबूझ कर पढाई में की गई लापरवाही को लेकर आप आगे चलकर पश्चाताप करेंगे।

 

आपके भाई-बंधु आपको कष्ट देंगे और आप उन्हें बर्दाश्त भी करेंगे। ऐसा भी हो सकता है कि आपके भाई बंधुओं को कष्ट सहना पडे या भाई-बंधुओं से क्लेश हो। जीवन साथी को कुछ हद तक कष्ट रह सकता है। आपको जीवन साथी या संतान को लेकर चिंताएं रह सकती हैं। दुष्टजनों से भय बना रहेगा। आपको अपनी संगति को हमेशा अच्छी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। आपके शरीर में वात रोग के कारण पीडा रह सकती है। आपको पेट की तकलीफ भी रह सकती है।

२. द्वितीय भाव में स्थित केतु का फल :-

इस भाव स्थित केतू आपको रूपवान बनाता है। सुफलों की श्रेणी में यह आपको सुखी और सम्पन्न भी बनाता है। ज्योतिषीय साहित्यों में कहा गया है कि यहां स्थित केतू आपको अत्यंत सुख देता है। आप अमित सुख के साथ-साथ धन लाभ भी प्राप्त करते हैं। कई अवसरों पर यह आपको मधुर वचन वक्ता भी बनाता है। लेकिन अधिकांश मामलों में यहां स्थित केतू को अशुभफल देने वाला ही माना गया है। आप कुछ हद तक व्यग्रचित्त हो सकते हैं। कई मामलों में आपको भ्रमित भी देखा जा सकता है। कभी-कभी आपको ऐसी अनुभूति होगी कि आपका भाग्य आपका साथ नहीं दे रहा है। मन संतापित रहता है।
कामों में व्यवधान आ सकते हैं। कई मामलों में आप धर्म के विरुद्ध जाते हुए पाए जाएंगे। आपको नीचों की संगति अधिक पसंद होगी। विद्या प्राप्ति में व्यवधान आ सकता है। आर्थिक समस्याएं बीच-बीच में परेशान कर सकती हैं। व्यर्थ के खर्चे बने रहेंगे। राजपक्ष या सरकार से भय रहेगा। पैतृक सम्पत्ति मिलने में व्यवधान आएगा।
कोई मुख रोग परेशान कर सकता है अथवा वाणी में कोई दोष हो सकता है। आदर सत्कार का वचन निकालने में अरुचि हो सकती है। भाषण सम्भाषण में सरसता का अभाव रहेगा। परिवार में कलह रह सकती है। मित्रों से विरोध हो सकता है और व्यवसाय में घाटा हो सकता है। अत: इन बातों को ध्यान में रखकर आचरण करें।
 
३. तृ्तीय भाव में स्थित केतु का फल :-

तीसरे भाव में स्थित केतू आपको मिले जुले परिणाम देगा। यह आपको बलवान बनाने के साथ-साथ धैर्यवान भी बनाता है। आप दान पुण्य़ के कार्यों में विश्वास करते हैं यही कारण है कि आप दानशील पुरुषों की संगति में रहते हैं। बलसाली और धनवान होंगे। आप यशस्वी बनेंगे। स्त्री तथा खान-पान का सुख आपको खूब मिलेगा।
आप शत्रुओं का दमन करने वाले होंगे अर्थात आपके शत्रु आपसे भयभीत रहेंगे। इस भाव में स्थित केतू के कुछ अशुभ फल भी कहे गए हैं। इस कारण से आप कुछ व्यर्थ की चिंताओं से घिरे रह सकते हैं। मन में कोई अनजाना भय समाया रह सकता है। कभी-कभी चित्त में भ्रम और चिंता से व्याकुलता रह सकती है। आपका विश्वास भूत प्रेतों में हो सकता है। अथवा आप भूत प्रेतों को देवाताओं की संज्ञा दे सकते हैं।
किसी कारण से समाजिक भय रह सकता है। भाइयों को कष्ट रह सकता है। मित्र भी कुछ हद तक प्रभावित रह सकते हैं। मित्रों से हानि होने का भय रहेगा। आपकी भुजाओं में पीडा रह सकती है। यदि आप व्यर्थ के वाद विवाद से जुडे रहेंगे तो भी आपको परेशानी रह सकती है। हालाकि यह स्थिति आपको शत्रुओं से बचाएगी।
४. चतुर्थ भाव में स्थित केतु का फल :-

केतू के चौथे भाव में स्थित होने के कुछ शुभफल बताए गए हैं उन्हीं के कारण आप शूर वीर और बलिष्ठ हो सकते हैं। आप सत्य बोलने में विश्वास रखते हैं। अधिकांशत: आप मधुरभाषी बने रहते हैं। आप धन धान्य से समृद्ध होंगे। आपको भाइयों और मित्रों से सुख मिलेगा। लेकिन यहीं स्थित केतू को अनेक प्रकार के दु:खों को देने वाला कहा गया है। जो आपको चंचल और बाचाल बना सकता है।
आप अपने कामों को करने में लापरवाही कर सकते हैं। आपके अंदर उत्साह की कमी देखने को मिल सकती है। आप पित्तप्रकृति के व्यक्ति होंगे। आप दूसरों की आलोचना करने वाले होंगे। अत: लोग आपको कुत्सित वृत्ति का इंसान समझने लगेंगे। आपको माता का सुख कम मिलेगा। अथवा आपकी माता अस्वस्थ रह सकती है। मित्रों के द्वारा भी कई प्रकार के कष्ट मिलते रहते हैं।
आपके पैतृक धन का विनाश हो सकता है अथवा आपको पैतृक धन से वंचित रहना पड सकता है। हो सकता है कि आपके पैतृक धन का विनाश करने में आपके अपनों या मित्रों का ही हाथ रहे। पैतृक धन नष्ट होने की अवस्था में आपको धनार्जन करने के लिए देश विदेश में भटकना पड सकता है, फिर भी मित्र मुह मोड लेते हैं। आर्थिक विपन्नता आपको परेशान किए रह सकती है। आपको विषबाधा का भी भय रहेगा। आपको अपने घर में रहने का सुख कम मिलेगा।
५. पंचम भाव में स्थित केतु का फल :-
केतू के पंचम में स्थित होने के कारण आप बलवान होंगे। यहां स्थित केतू आपके संतानो की संख्या को कम करता है अत: आपके पुत्र कम और कन्याएं अधिक होंगी। आपकी संतानों को आपके बांधवों से अधिक लगाव होगा। गाएं आदि पशुओं का लाभ होगा अर्थात आपको पशु धन की प्राप्ति पर्याप्त मात्रा में होगी। आपको तीर्थयात्रा करना या विदेश में रहना अधिक पसंद होगा।
आप अधिक पराक्रमी होने के बावजूद भी दूसरों की नौकरी करना पसंद करेंगे। हांलाकि आपके पास भी नौकर चाकर होंगे। कुछ छल-कपट करके भी आप लाभ कमा सकते हैं। आपके भाई बंधु सुखी रहते हैं। आपके द्वारा दिए गए उपदेश लोगों पर खूब प्रभाव डालते हैं। आप विदेश जाने के इच्छुक रहेंगे। लेकिन यहां स्थित केतू कई प्रकार के अशुभ फल भी देता है। अत: आपमें धर्य की कमी देखने को मिल सकती है।
आपके दिलो-दिमाग में नकारात्मक विचारों का बाहुल्य हो सकता है। आपको अपने ही गलत निर्णयों के लिए पश्चाताप करना पड सकता है। आपको अपने ही भ्रमात्मक ज्ञान और गलती के कारण शारीरिक कष्ट मिल सकता है। सगे भाइयों से विवाद हो सकता है। तंत्र-मंत्र के माध्यम से कष्ट मिल सकता है। पुत्र सुख में कमी रह सकती है। उदर भाग में चोट लगने के कारण या अन्य कारणों से कष्ट मिल सकता है।

 

६. छ्टें भाव में स्थित केतु का फल :-

यहां स्थित केतू आपके शरीर को निरोगी बनाता है। यदि कोई रोग होता भी है तो वह शीघ्र ही ठीक हो जाता है। आप अपने भाइयों को प्रिय और उदार चरित्र के होंगे। आप गुणवान और दृढ प्रतिज्ञ व्यक्ति हैं। आप एक प्रसिद्ध व्यक्ति होंगे। आप अपनी विद्या के कारण यश प्राप्त करेंगे। आपको अपने जीवन काल में श्रेष्ठ पद मिलेगा। आप इष्टसिद्धि प्राप्त कर सकते हैं।
आपको पशुओं से लगाव हो सकता है फल स्वरूप आपके पास पशु धन खूब होगा। आप अपने शत्रुओं को नष्ट करने वाले और विभिन्न विवादों में विजय पाने वाले व्यक्ति हैं। आपको द्रव्य लाभ होता रहेगा। आप फिजूलखर्ची न करके धन की बचत करेंगे। यहां स्थित केतू कई प्रकार के अशुभफल भी देता है। फलस्वरूप आप कुछ झगडालू स्वभाव के हो सकते हैं।
आपको भूत प्रेत जैसी बाधाओं से कष्ट मिल सकता है। माता या ननिहाल पक्ष से आपको कुछ हानि हो सकती है। मामा का सुख कम मिलेगा। किसी कारण से मामा से मतभेद होने के कारण आपको ननिहाल से आदर सम्मान नहीं मिल पाएगा। आपको दांत का रोग अथवा होंठों से सम्बंधित कोई परेशानी हो सकती है। फिर भी आप विभिन्न प्रतिस्पर्धात्मक परिक्षाओं और विवादों में सफल होंगे।
७. सप्तम भाव में स्थित केतु का फल :-
यहां स्थित केतू को केवल आर्थिक मामलों के लिए कुछ हद तक अच्छा माना गया है। अत: आपको धन का उत्तम सुख मिल सकता है, और लौटा हुआ धन स्थिर रहेगा। लेकिन अधिकांश मामलों में यहां स्थित केतू को अशुभफल दाता कहा गया है। कहा गया है कि यहां स्थि केतू जातक को मतिमंद और मूर्ख बनाता है। जातक अच्छे को बुरा और बुरे को अच्छा समझता है।

जातक स्वयं के चरित्र को ध्यान में न रखकर दूसरों के चरित्र पर संदेह करता है। यहां स्थित केतू आपका अपमान करा सकता है। वैवाहिक सुख कम मिलता है। दुष्टों की संगति मिलती है। मित्रों से भी कष्ट मिलता है। यात्राएं कष्टकारी या असफल हो जाती हैं। आपको मार्ग संबंधी चिंताएं रहेंगी। आपका धन अधिक खर्च होगा।

कई मामलों में आपका धन बेकार में नष्ट हो जाएगा। आपको आर्थिक चिंता रह सकती है। पिता के द्वारा संचित धन जल्दी नष्ट हो जाता है। शत्रुओं का भय रहता है और शत्रुओं के द्वारा धन हानि भी होती है। सरकार से भी भय बना रहता है। वात रोग, अंतडियों के रोग और वीर्य संबंधी रोग हो सकते हैं। आपको जल के माध्यम से भी भय बना रहेगा।

८. अष्टम भाव में स्थित केतु का फल :-

यहां स्थित केतू के कुछ शुभ फल कहे गए हैं। अत: आप पराक्रमी और सदैव उद्यम करने वाले व्यक्ति हो सकतें हैं। आप अपने कामों के प्रति गंभीर रहते हैं। खेलकूद में भी आपकी गहरी रुचि होगी। आप सुखी रहेंगे। आप शीलवान व्यक्ति हैं। आपको खूब धनलाभ होगा। कई मामलों में आपको सरकार से भी धन की प्राप्ति हो सकती है।
अधिकांश मामलों में यहां स्थित केतू को अशुभफल देने वाला माना गया है। अत: आपको दुष्टजनों की संगति अधिक प्रिय होगी। आप लोभी और चालाक हो सकते हैं। किसी व्यक्ति को कष्ट पहुंचाने में आपको कोई हिचक नहीं होगी। आप जाने अंजाने कुछ ऐसे काम कर सकते हैं जो पाप संज्ञक हो सकते हैं। कभी-कभी आपके द्वारा किए कार्यों से विवेकहीनता परिलक्षित हो सकती है।

 

यहां स्थित केतू आपको गुह्यरोग, मुखरोग या दंत रोग देता है। यह स्थिति आर्थिक मामलों के लिए अच्छी नहीं होती। दूसरों को दिए हुए अपने द्रव्य को मिलने में रुकावट होती है। धन आगमन में व्यवधान आता है। दूसरों के धन और जन के प्रति आशक्ति हो सकती है। वाहन आदि के माध्यम से कष्ट मिल सकता है। मित्रों से विवाद या अलगाव भी हो सकता है।
९. नवम भाव में स्थित केतु का फल :-
यहां स्थित केतू आपको पराक्रमी बनाता है। आप अपने साथ कोई अस्त्र-शस्त्र लेकर चलना पसंद करेंगे। आप स्वभाव से उदार और दयालु होंगे। आप धर्म को महत्त्व देने वाले होंगे। दान-धर्म और तप में भी आपकी अच्छी रुचि होगी। आपके क्लेश और कष्ट क्षणिक होंगे। आपको म्लेक्ष जाति से लाभ होगा और वे आपके कष्टों को दूर करने में भी सहायक होंगे।
आपको विदेश या विदेशियों से भी लाभ होगा और इसी माध्यम से भाग्योदय होगा। आप समाज में विशेष आदरणीय तो नहीं हो पाएंगे लेकिन सुखी और और भाग्यवान हो सकते हैं। लेकिन आपकी मित्रता कुछ गलत आचरण करने वालों से भी हो सकती है और आप उनकी संगति में कुछ अनैतिक काम करके धनलाभ कमाएंगे। आपको पुत्र सुख और धन का लाभ होगा।
यहां स्थित केतू सरकार के माध्यम से भी लाभ कराता है। लेकिन पिता के सुख में कमी लाता है। कभी-कभी आपके द्वारा किए गए धार्मिक कृत्य दिखावा मात्र होते हैं। आपके सहोदर या भाइयों को कष्ट मिलता है। सगे भाई भी अपको कष्ट पहुंचा सकते हैं। संतान संबंधी चिंता रह सकती है। आपके बाजुओं में कुछ कष्ट रह सकता है। दूसरे धर्म या देश के लोगों से लाभ पाने की इच्छा रहती है।
 
१०. दशम भाव में स्थित केतु का फल :-

दशम भाव में स्थित केतू अपको तेजस्वी और बलवान बनाता है। आप बुद्धिमान और विभिन्न शास्त्रों को जानने वाले व्यक्ति हैं। आप आत्मज्ञानी और शिल्पकला के जानकार भी हैं। आप हर मामले में विजय प्राप्त करने वाले और प्रसिद्ध व्यक्ति होंगे। आप स्वभाव से मिलनसार व्यक्ति हैं। आप एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और आपका प्रभाव अतुलनीय है।
आपके विरोधी भी आपकी प्रसंशा करेंगे। आपको यात्राएं बहुत पसंद होंगी। आप शत्रुओं को परास्त करने वाले व्यक्ति हैं। लेकिन यहां स्थित केतू कुछ अशुभफल भी देता है फलस्वरूप आप कुछ व्यर्थ के कामों में अपने परिश्रम को बेकार कर देते हैं। आप कुछ हद तक अभिमानी भी हैं। माता पिता में से किसी एक का सुख कम मिलेगा। पिता को लेकर कुछ चिंता रह सकती है।
जब भी आप अच्छे काम के लिए प्रयत्नशील होंगे, उसमें कुछ व्यवधान आ सकते हैं। वाहन से भी आपको कुछ भय रह सकता है अत: वाहनादि सावधानी से चलाएं। पशुओं के माध्यम से कुछ पीडा रह सकती है। आपको पराए संबंधों से अधिक लगाव हो सकता है। आप मानसिक रूप से असंतुष्ट रह सकते हैं। यहां स्थित केतू आपको गुदा, पांव, वात आदि रोग दे सकता है। आपको चोरों के द्वारा कष्ट रहेगा।
 
११. एकादश भाव में स्थित केतु का फल :-

यहां स्थित केतू आपको अनेक प्रकार के शुभफल देगा। आप देखने में आकर्षक और मनोहर व्यक्तित्त्व के स्वामी होंगे। आप विशेष कांति वाले तेजस्वी व्यक्ति हैं। आपको अच्छे कपडे पहनने का शौक होगा। आप परोपकारी और दयालु स्वभाव के हैं। आप स्वभाव से उदार और हमेशा संतुष्ट रहने वाले व्यक्ति हैं। आप उत्तम शिक्षा प्राप्त करेंगे।
आप शास्त्रों को जानने वाले, हंसमुख स्वभाव के विद्वान व्यक्ति हैं। आप सरस और मधुरभाषी हैं। आप पराक्रमी, प्रतिष्ठित और लोकप्रिय होंगे। दूसरे लोग भी आपकी प्रसंशा करेंगे। आप सरकार या राजा के द्वारा सम्मान प्राप्त करेंगे। आप अनेक प्रकार के आभूषणों और ऐश्वर्य से सम्पन्न होंगे। आपकी आमदनी के कई स्रोत होंगे।
आप भाग्यवान व्यक्ति हैं और आपका घर बडा सुंदर होना चाहिए। आप किसी भी काम को अधूरा नहीं छोडना चाहते। शत्रु आपसे भयभीत रहते हैं। लेकिन यहां स्थित केतू कुछ अशुभफल भी देता है फल्स्वरूप आप कुछ हद तक चिंतित भी रह सकते हैं और अपने हांथों अपनी हानि कर लेते हैं। संतान से संबंधित चिंता रह सकती है। कुछ पेट की बीमारियां भी हो सकती हैं।

 

१२. द्वादश भाव में स्थित का फल :-
यहां स्थित केतू शुभफलों के रूप में आपको राजा के समान सुख और ऐश्वर्य दे सकता है। आपकी आंखे सुंदर होंगी। आप अच्छी शिक्षा प्राप्त करेंगे। आप शास्त्रों को जानने वाले कवित्त सम्पन्न व्यक्ति हैं। आप शत्रुओं को पराजित कर शत्रुओं का नाश करने वाले व्यक्ति हैं। वाद-विवाद में आप हमेशा विजयी रहते हैं।
धार्मिक और शुभ कर्मों कें आप धन खर्च करते हैं। अर्थात आपका धन अच्छे कार्यों में खर्च होता है। लेकिन यहां स्थिति केतू कुछ अशुभ परिणाम भी देता है जिसके कारण आप चंचल स्वभाव के भी हो सकते हैं। आप किसी पर विश्वास नहीम करेंगे। लोंगो को भ्रमित करते रहेंगे। आप कुछ हद तक डरपोक भी हो सकते हैं।
आपका मन अशांत रह सकता है। आपकी पुरानी सम्पत्ति नष्ट हो सकती है। आपको आखों से सम्बंधित कोई तकलीफ हो सकती है। पेट के आस-पास कोई रोग हो सकता है या कष्ट रह सकता है। गुदा में या गुह्यभाग में रोग हो सकता है। पांवों से सम्बंधित कोई तकलीफ रह सकती है। मामा से कम सुख मिलेगा। आपको अपने जीवनकाल में बहुत सी यात्राएं करनी पडेंगी।

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