बुध का भाव में प्रभाव

कुंडली के बारह भावों में बुध की दशा

१. प्रथम भाव में बुध 

पीली आभा लिये चेहरा होता है,लम्बी उम्र का मालिक होता है,गणित और गणना करने वाले विषयों में प्रवीणता होती है,मजाकिया स्वभाव होता है यानी हर बात को मजाकिया लहजे में कहना,धर्म के कार्यों में रुचि होती है।
२. दूसरे भाव में बुध 

अच्छे कार्य करने में रुचि होती है,हिम्मत बहुत होती है,बुद्धि से तेज होता है,मेहनत भी खूब करता है,वकील या नेता जैसे गुण होते है बात की बात में धन होता है,दलाली और शेयर बाजार वाले कामो में रुचि होती है।
३. तीसरे भाव में बुध :-

लेखनी का पक्का होता है,कम्पयूटर और इसी प्रकार के यंत्रों को संचालित करने की क्षमता होती है,सोफ़्टवेयर आदि बनाने में निपुणता होती है,चित्रकारी और कविता करने में रुचि होती है,विषयों में आशक्ति होती है,सदगुण भी भरे होते है,मोटा शरीर होता है,गोलमटोल आकृति होती है,बहिने अधिक और भाई कम होते है,पिता का धन बेकार हो जाता है।

४. चौथे भाव में बुध 

 
भाग्यवान होता है,दान करने में निपुण होता है,दान देने में कुपात्र और सुपात्र को समझने की हिम्मत होती है,लिखने की कला होती है,नीतियों पर चलने का आदी होता है,बुद्धिवान होता है।
५. पंचम भाव में बुध 

जन्म से स्वार्थ जीवन में भरा होता है,अपना काम निकालने में चतुरता होती है,काम निकालने के बाद भूलने की आदत होती है,सन्तान का अभाव होता है,केवल धन की चाहत होती है,जमीनी काम को करने और जमीन आदि के प्रति मानसिकता बनी रहती है। जन्म से स्वार्थ जीवन में भरा होता है,अपना काम निकालने में चतुरता होती है,काम निकालने के बाद भूलने की आदत होती है,सन्तान का अभाव होता है,केवल धन की चाहत होती है,जमीनी काम को करने और जमीन आदि के प्रति मानसिकता बनी रहती है।

६. छठे भाव में बुध 

कलेश करना अच्छा लगता है,लेकिन वाणी में मिठास होती है,आलसी शरीर होता है,अभिमान की मात्रा भरी होती है,परिश्रमी और कामुकता का समावेश मिलता है। दूसरों की सेवा करना अच्छा लगता है।
७. सप्तम भाव में बुध 
पति या पत्नी के लिये सुखदायक होता है,कान्तिवान शरीर होता है,तोंद निकल जाती है,सुन्दर और कुलीन प्रकृति होती है,सम्पादन करने की क्षमता होती है,उदार प्रकृति होती है।
८. अष्टम भाव में बुध 
लम्बी उम्र होती है,सुन्दर पत्नी या पति होता है,बात का भरोसा नही होता है,खेती के कार्य में निपुणता होती है,जैसे बागवानी आदि,न्याय करने के अन्दर बेईमानी का समावेश होता है,व्यापार से लाभ केवल दलाली वाले कामों में होता है।
९. नवम भाव में बुध 
बुद्धिमान होता है,तीर्थाटन करने की कामना होती है,अपने समाज में बात रखने वाला होता है कवि गान विद्या में डिग्री या डिप्लोमा होता है,न्याय यात्रा करवाने वाले कार्यों का मानस रहता है। विदेशी लोगों और अंग्रेजी में अच्छा ज्ञान होता है।

 

१०. दसम भाव में बुध 
राज योग का कारण बनता है,अल्पायु होना भी माना जाता है,माता की बहिन से स्वभाव मिलता जुलता है,पिता के प्रति वफ़ादारी नही होती है,खुद के कामों को खुद के प्रयासों से ही खत्म करने की भावना बन जाती है।
११. ग्यारहवें भाव में बुध 
लाभ में अपार सम्पत्ति की कामना होती है पिता की जायदाद मिलती है,छोटे भाई बहिनो से स्नेह होता है,माता के लिये कष्टकारी होता है,शिक्षा और मनोरंजन में अधिक ध्यान रहता है।
१२. बारहवें भाव में बुध 
विद्वान धर्मात्मा स्वभाव होता है,किसी भी भाषा को पकडने की क्षमता होती है,दैवीय ज्ञान की जानकारी होती है,समाज में गुणी माना जाता है,शास्त्र का अच्छा ज्ञान होता है आलसी शरीर होता है |

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