शुक्र ग्रह की शांति के उपाय

शुक्र ग्रह की शांति के उपाय

शुक्र का सामान्य दशा फल :-
जन्म कुंडली में शुक्र स्व ,मित्र ,उच्च राशि -नवांश का ,शुभ भावाधिपति ,षड्बली ,शुभ युक्त -दृष्ट हो तो शुक्र की शुभ दशा में सुख साधनों में वृद्धि ,वाहन सुख ,धन ऐश्वर्य ,विवाह ,स्त्री सुख ,विद्या लाभ ,पालतू पशुओं की वृद्धि ,सरकार से सम्मान ,गीत –संगीत व अन्य ललित कलाओं में रूचि ,घर में उत्सव ,नष्ट राज्य या धन का लाभ ,मित्र –बन्धु बांधवों से समागम ,घर में लक्ष्मी की कृपा ,आधिपत्य ,उत्साह वृद्धि ,यश –कीर्ति ,श्रृंगार में रूचि ,नाटक –काव्य रसिक साहित्य व मनोरंजन में आकर्षण ,कन्या सन्तिति की संभावना होतीहै | चांदी ,चीनी,चावल ,दूध व दूध से बने पदार्थ,वस्त्र ,सुगन्धित द्रव्य ,वाहन सुख भोग के साधन ,आभूषण ,फैंसी आइटम्स इत्यादि के क्षेत्र में लाभ होता है |सरकारी नौकरी में पदोन्नति होती है | रुके हुए कार्य पूर्ण हो जाते हैं | जिस भाव का स्वामी शुक्र होता है उस भाव से विचारित कार्यों व पदार्थों में सफलता व लाभ होता है |
यदि शुक्र अस्त ,नीच शत्रु राशि नवांश का ,षड्बल विहीन ,अशुभभावाधिपति पाप युक्त दृष्ट हो तो शुक्र की अशुभ दशा में विवाह व दाम्पत्य सुख में बाधा ,धन की हानि ,घर में चोरी का भय ,गुप्तांगों में रोग,स्वजनों से द्वेष ,व्यवसाय में बाधा ,पशु धन की हानि , सिनेमा –अश्लील साहित्य अथवा काम वासना की ओर ध्यान लगे रहने के कुप्रभाव से शिक्षा प्राप्ति में बाधा होती है | जिस भाव का स्वामी शुक्र होता है उस भाव से विचारित कार्यों व पदार्थों में असफलता व हानि होती है।

 

गोचर में शुक्र का प्रभाव :-

जन्म या नाम राशि से 1,2,3,4,5,8,9,11,12 वें स्थान पर शुक्र शुभ फल देता है |शेष स्थानों पर शुक्र का भ्रमण अशुभ कारक होता है |
जन्मकालीन चन्द्र से प्रथम स्थान पर शुक्र का गोचर सुख व धन का लाभ,शिक्षा में सफलता ,विवाह,आमोद-प्रमोद ,व्यापार में वृद्धि कराता है |
दूसरे स्थान पर शुक्र के गोचर से नवीन वस्त्राभूषण ,गीत संगीत में रूचि ,परिवार सहित मनोरंजन ,धन लाभ व राज्य से सुख मिलता है |
तीसरे स्थान पर शुक्र का गोचर मित्र लाभ ,शत्रु की पराजय ,साहस वृद्धि ,शुभ समाचार प्राप्ति ,भाग्य वृद्धि ,बहन व भाई के सुख में वृद्धि व राज्य से सहयोग दिलाता है |
चौथे स्थान पर शुक्र के गोचर से किसी मनोकामना की पूर्ति ,धन लाभ ,वाहन लाभ ,आवास सुख ,सम्बन्धियों से समागम ,जन संपर्क में वृद्धि व मानसिक बल में वृद्धि होती है |
पांचवें स्थान पर शुक्र के गोचर से संतान सुख ,परीक्षा में सफलता ,मनोरंजन ,प्रेमी या प्रेमिका से मिलन ,सट्टा लाटरी से लाभ होता है |
छ्टे स्थान पर शुक्र के गोचर से शत्रु वृद्धि ,रोग भय ,दुर्घटना ,स्त्री से झगडा या उसे कष्ट होता है |
सातवें स्थान पर शुक्र के गोचर से जननेंन्द्रिय सम्बन्धी रोग ,यात्रा में कष्ट ,स्त्री कोकष्ट या उस से विवाद ,आजीविका में बाधा होती है|
आठवें स्थान पर शुक्र के गोचर से कष्टों की निवर्ति ,धन लाभ व सुखों में वृद्धि होती है |
नवें स्थान पर शुक्र के गोचर राज्य कृपा,धार्मिक स्थल की यात्रा ,घर में मांगलिक उत्सव ,भाग्य वृद्धि होती है |
दसवें स्थान पर शुक्र के गोचर से मानसिक चिंता ,कलह,नौकरी व्यवसाय में विघ्न ,कार्यों में असफलता ,राज्य से परेशानी होती है |
ग्यारहवें स्थान पर शुक्र के गोचर से धन ऐश्वर्य की वृद्धि,कार्यों में सफलता, मित्रों का सहयोग मिलता है |
बारहवें स्थान पर शुक्र के गोचर सेअर्थ लाभ, भोग विलास का सुख,विदेश यात्रा ,मनोरंजन का सुख प्राप्त होता है |
( गोचर में शुक्र के उच्च ,स्व मित्र,शत्रु नीच आदि राशियों में स्थित होने पर , अन्य ग्रहों से युति ,दृष्टि के प्रभाव से , अष्टकवर्ग फल से या वेध स्थान पर शुभाशुभ ग्रह होने पर उपरोक्त गोचर फल में परिवर्तन संभव है |

 

अशुभ शुक्र गृह की शान्ति के उपाय :-

जन्मपत्रिका अथवा गोचर के शुक्र के अशुभ प्रभाव समाप्त कर उनको शुभ प्रभाव में बदलनें के लिए ज्योतिषाचार् के अनुसार कुछ ऐसे उपाय जिनको करने से आप निश्चित ही लाभान्वित होंगे। कोई भी उपाय शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार से आरम्भ करें

सदैव स्वच्छ वस्त्र पहनें तथा इत्र का प्रयोग करें।

स्त्री वर्ग का सदैव सम्मान करें।
शुक्र सम्बन्धित किसी भी वस्तु को मुफ्त में ना लें।
भोजन से पहले गाय के लिए भोजन का कुछ हिस्सा निकालें।
कभी भी फटे या जलें कपड़े नहीं पहनने चाहिए।
शुक्रवार को सुहागिन महिला को सुहाग सामग्री के साथ इत्र का दान करे।

शुक्र तांत्रिक मंत्र

ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:

शुक्र गायत्री मंत्र ॐ  भृगुवंशजाताय विद्यमहे। श्वेतवाहनाय धीमहि।तन्नो : कवि: प्रचोदयात॥

शुक्रवार के दिन किसी नवग्रह मंदिर या घर के देवालय में यथासंभव शुक्रदेव की सोने से बनी मूर्ति या लिंग रूप प्रतिमा की यथाविधि पूजा करें. पूजा में दो सफेद वस्त्र, सफेद फूल, गंध और अक्षत चढ़ाएं. पूजा के बाद शुक्रदेव को खीर या घी से बने सफेद पकवान का भोग लगाएं. पूजा के बाद इस शुक्र गायत्री मंत्र का कम से कम 108 बार जप करना श्रेष्ठ होता है.

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